जनवरी ३१, २०११
ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है|
मै यहाँ पैदा हुआ एक वृक्ष हूँ
मुझे बसंत राज की प्रतीक्षा है
मुझे प्रतीक्षा है उन हवाओ की ,
जो आयेंगी कुछ तपिश ले कर
यहाँ मेरा सम्पूर्ण वर्ष
बट जाता है ऋतुओ में ,
जो अति तक पहुँच कर मुझे
शिक्षा देती हैं विश्वास व् धीरज की |
ऋतुराज तुम्हारा स्वागत है|
मेरा पिछला जन्म भारत भूमि में था
जहाँ बसंत की बहार ही कुछ और थी |
वहां तो पक्षिओ की अलग चहचाहहट
ही मुझे सन्देश देने लगती थी |
तुम्हारे पदचाप की |
जो मन को गुदगुदाती थी की बस अब
कोमल कोपले मुझमे जन्मे गी
फिर पुष्पित हो कर फलित होंगी,
किन्तु यहाँ की तरह मुझे वहां तुषारपात का भय न था |
यहाँ मुझे बसंत उत्सव मनाने का
वक्त ही कम मिलता है
अल्प काल में ही मुझे
द्रुत गति से पुष्पित पल्लवित
होने के दबाव में , प्रसंता भी देनी होती है |
पक्षी भी चहकते हैं सीमा में ही रह कर
मुझे अपने ही अस्तित्व के लिए
घोर संघर्ष करना पड़ता है |
वैसे मै धरती के दुसरे भागो की तरह ही
यहाँ भी जीवन , दृश्य व् अध्यात्म का ही
एक जीवित ज्वलंत उदाहरण हूँ
मुझे प्रतीक्षा है ऋतुराज की |
इति भुवनेश्वरी पाण्डेय
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